Gulzaar Bewafa Shayari 2022

फिर से निकलेंगे तलाश-ए-ज़िन्दगी में दुआ करना इस बार कोई बेवफा न निकले

वो अक्सर मुझसे पूछा करती थी,, तुम मुझे कभी छोड़ कर तो नहीं जाओगे, काश मैंने भी पूछ लिया होता

वक़्त ने ज़रा सी करवट क्या ली, गैरो की लाइन में सबसे आगे पाया अपनों को

बेवफ़ाओं की महफ़िल लगेगी ऐ दिल-ए-जाना, आज ज़रा वक़्त पर आना मेहमान-ए-ख़ास हो तुम।

टूटे कांच की तरह, चकना चुर हो गए, चुभ ना जाए कहीं, इसलिए सबसे दूर हो गए।

मिल ही जाएगा कोई ना कोई टूट के चाहने वाला, अब शहर का शहर तो बेवफा हो नहीं सकता।

इतनी मुश्किल भी न थी राह मेरी मोहब्बत की, कुछ ज़माना खिलाफ हुआ कुछ वो बेवफा हुए।

बिखरा वज़ूद, टूटे ख़्वाब, सुलगती तन्हाईयाँ… कितने हसींन तोहफे दे जाती है ये अधूरी मोहब्बत।

सिर्फ एक ही बात सीखी इन हुस्न वालों से हमने​​, ​हसीन जिसकी जितनी अदा है वो उतना ही बेवफा 

दर्द मोहब्बत का ऐ दोस्त बहुत खूब होगा, न चुभेगा.. न दिखेगा.. बस महसूस होगा।

मैं खुश हूं कि उसकी नफ़रत का अकेला वारिस हू मोहब्बत तो उनको बहुत से लोगों से है..